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#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_55

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एक बहुत ही प्यारा सा गजल ; ♥️🌹 वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो “मोमिन ख़ाँ मोमिन” वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर वो करम कि था मिरे हाल पर मुझे सब है याद ज़रा ज़रा तुम्हें याद हो कि न याद हो वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो हुए इत्तिफ़ाक़ से गर बहम तो वफ़ा जताने को दम-ब-दम गिला-ए-मलामत-ए-अक़रिबा तुम्हें याद हो कि न याद हो कोई बात ऐसी अगर हुई कि तुम्हारे जी को बुरी लगी तो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो कि न याद हो कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया इक आप ने वा'दा था सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो कहा मैं ने बा...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_54

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हमारी कविता संग्रह : उफ्फ मेरा चाँद न जाने कितनों को दीवाना बनाएगा कभी दीवाना हुआ बादल कभी दीवाने हुए कायल उफ्फ मेरा चाँद… न जाने कितनों को भला तड़पायेगा कभी यह घन में छुपता कभी यह मन में छुपता उफ्फ मेरा चाँद… न जाने कौन सी पीड़ को छुपाता दिल में कभी इसका आकार घटता-बढ़ता कभी तन पे में काला धब्बा दिखता उफ्फ मेरा चाँद… न जाने कौन सी अदा है इसके फलक पर कभी इसमें महबूब नजर आए कभी इसमें महबूबा नजर आए उफ्फ मेरा चाँद… न जाने कब तृप्त होंगे मन भी नयन भी कभी कोई चकोर रात भर तकता  कभी दीवाना दिनभर आहें भरता उफ्फ मेरा चाँद… न जाने मेरे चाँद को किसकी नजर लगी कभी अमावस की रात होती है कभी नभ में बदल घुमड़ते हैं उफ्फ मेरा चाँद… न जाने चाँद के चांदनी की शीतलता मिलेगी कभी बरगद के पेड़ों से ओझल होती हैं कभी वो बदल के पीछे छुप जाती है उफ्फ मेरा चाँद…

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_53

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हमारी कविता संग्रह : “आपसे बिछड़े तो…” आपसे यदि बिछड़े तो, हम खूब रोया करेंगे जब भी याद आएंगे आप, हम पुकारा करेंगे बड़े बेबस, लाचार और मजबूर हैं अभी हम तो क्या कहूँ आपको कहने से और उलझ जाएंगे आपसे यदि बिछड़े तो… समय से पीछे होने की सजा वक्त न दे मुझको आपसे बिछड़ के किसी और के भी न हो पाएंगे आपसे यदि यदि बिछड़े तो… आप सा हमसफर न मिला न मिल सकेगा मुझे आप सोचिए भला आपके बगैर कैसे जी पाएंगे आपसे यदि… आप हैं, हम हैं, ये वादियाँ हैं और सुहाना सफर हम जब मिलेंगे तो आपको हरदम सँवारा करेंगे आपसे यदि बिछड़े तो… #आशा   #बेबसी   #लगाव

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_52

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हमारी कविता संग्रह  जिंदगी बस वो जिंदगी है.! ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है.! न उमंग है,  न तरंग है न खुशी है, न शुकुन है, जिंदगी बस वो जिंदगी है जहाँ अपने हों, अपनापन हो… ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है.! हर तरफ बेबसी, हर तरफ घुटन हर तरफ चीख, हर तरफ जख्म, जिंदगी बस वो जिंदगी है जहाँ अमन हो, शांति हो… ये जिंदगी भी कोई जिंदगी हो.! जहाँ बस यादें हों, बस सपने हों जब चाहूँ मिलना, रहें अंधेरी हों, जिंदगी बस वो जिंदगी है जब भी सोचूँ मिलना, वो सामने हो… ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है.! जहाँ तृष्णा हों, जहाँ तड़पन हों जहाँ दूरी हो, जहाँ मजबूरी हो, जिंदगी बस वो जिंदगी है मेरे जख्मों पर उनका मरहम हो… ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है.! जहाँ आप हों पर मुलाकात न हों जहाँ साथ हों पर बात न हों, जिंदगी बस वो जिंदगी है जब बोलूं कुछ न, सुन ले सबकुछ… ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है.! जहाँ मिलने को जी चाहे पर कदम न बढ़े बातें बहुत हों पर सामने मुँह न खुले, जिंदगी बस वो जिंदगी है मैं दर्द में रहूँ तो दुःखी आप हों… ये जिंदगी भी कोई जिंदगी है.! जहाँ व्यथा न अपनी बोल सकूँ जहाँ मन क...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_51

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हमारी कविता संग्रह - 03 न किसी ने सराहा... न  किसी  ने सराहा , न  किसी  का  सहारा मैं उतना ही जिया, जितना खुद को निखारा लोग लुटते भी  रहे, और लोग लूटते भी रहे मैं जहाँ भी गया, हर तरफ बस यही था नजारा मैं उतना ही जिया... हर तरफ हाथों में डंडे, हर सर खून से लतपत ऐसे भी कितनों का चलेगा कब तक गुजारा मैं उतना ही जिया... टूटती साँसें, चीखते स्वजन, बिलखती आवाजें ऐसे हालात में इंशां का न होगा जीना गवारा मैं उतना ही जिया... हमें आपसे है ढेरों उम्मीदें, इसका खयाल रखियेगा यों तो बहुत लोग मिले मुझसे, सबसे किया किनारा मैं उतना ही जिया... ये जो दुनियाँ है रंगबिरंगी, सब झूठे हैं, दिल सूने हैं दो कदमों के साथ बस,सबने खुद को खुद हीं सँवारा मैं उतना ही जिया....

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_50

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हमारी कविता संग्रह - 02 “सत्यमेव जयते दुहरायेंगे” जन-जन में क्रांति-बीज बोने वाले राजद्रोही कहलायेंगे चोर - ठग सब एकत्रित होकर समाजवादी कहलायेंगे मूक-बधिरों की आवाज बनने वाले सज्जन मुहाजिर होंगे दलितों को घर-बेघर करने वाले पद-प्रतिष्ठा नवाजे जाएंगे वंचितों को हक़ दिलाने वाले देशद्रोही कहलायेंगे गरीब-गुरवों को बेघर करने वाले राष्ट्रवादी कहलायेंगे हाँ-में-हाँ, जी-में-जी वाले समाज में पद विशिष्ट पाएंगे रात-को-रात औ दिन-को-दिन कहने वाले तड़पाये जाएंगे सच के लिए जो मुखर होवेंगे, जो सच के साथी कहलायेंगे अभी जो कह लें दुनियाँ वाले, कल आदर्श पुकारे जाएंगे सच है, सच वालों को दर्द बहुत, आज उन्हें मिटाए जाएंगे समय जब इतिहास लिखेगा कल,तब वो शूरमा कहे जाएंगे समय की चक्की हर पल 'सत्यमेव जयते' को दुहरायेंगे साथी डरो मत जूझो असत्य से, कल जन-जन तुम्हें गाएंगे

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_49

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हमारी कविता संग्रह - 01 अनकही अनसुनी बातें  वो बातें जो अनकही थी, कही हमने और जो बातें अनसुनी थी, सुनी तुमने कौन किसी के दर्द का हम-दर्द है यहाँ कौन किसकी सुनता है, मेरी सुनी तुमने दर्द, बेचैनी, घुटन सब जाते रहे दिल से ऐसा लगा दिल को की कुछ कहा तुमने दोस्त दुश्मन अपने सभी खपा हैं हमसे हाथों को जबसे मेरे दिल पे रखा तुमने ये फूल, कलियां, भँवरे रूठे गए हैं हमसे अपने होंठों पे मेरा नाम लिया जब तुमने © हमारी अन्य कविता पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर जाएं👇 https://kavishala.in/@akshay-anand-shri