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#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_33

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#एक_सकारात्मक_विश्लेषण  दिनांक : 23.02.2021, मंगलवार #लोकतंत्र_में_लोग_सरकार_बदलते_क्यों_हैं ..?? के उत्तर में सुश्री twitter.com/VanditaMishr जी अपने #क्विक_रिएक्शन के माध्यम से लिखती हैं की ; लोकतंत्र में "लोग" सरकार इसलिए बदलते हैं जिससे लोगों के #जीवन_स्तर_में_बढ़ोतरी , #सुरक्षा और #स्वतंत्रता आदि मुद्दों पर कुछ और #सकारात्मक_बदलाव को देखा और महसूस किया जा सके. सरकार यह छोटी सी बात नहीं समझ पा रही है कि यह देश आज, कल या पिछले कल नहीं बना, इसका निर्माण #गीता लिखने और #श्रीराम के पैदा होने से पहले ही हो चुका था. यहां......आम जनमानस को डराया नहीं जा सकता. #श्रीमद्भागवतगीता के 16वें अध्याय में दैवीय गुण बताए गए हैं जिसमें " #अभय " सबसे ऊपर है. यह भारत का गुण है, भारत की #आत्मा है... और ज्यादा पढ़ने हेतु नीचे दिए #क्विक_रिएक्शन को और #श्रीमद्भागवद्गीता के 16वें अध्याय को पुरा पढ़ें. ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● #रामचरितमानस के उत्तरकांड में भी बाबा तुलसीदास जी लिखते हैं कि लंकाविजय के उपरांत अयोध्या में राज्याभिषेक के बाद एक दिन प्रभु श्रीराम अपने सभी स...

#अभ्युदय_से_चरमोत्कर्ष #एपिसोड_32

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  #अभ्युदय_से_चरमोत्कर्ष #एपिसोड_32 पितृपक्ष तर्पण : विधि एवं मंत्रोच्चारण देव तर्पण आरम्भ : भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, चतुर्दशी एवं पूर्णिमा पितृ तर्पण आरम्भ : आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा ( पैरवा ) तिथि से आरम्भ तर्पण की विधि और मंत्र स्नान के उपरांत मन के शुद्धिकरण हेतु गायत्री मंत्र का एक बार स्मरण करें (१) { देवतर्पण } पूर्व दिशा की ओर खड़े होकर, हाथ में त्रिकुशा लेकर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुए १-१ अञ्जलि जल दें ⤵️ ॐ ब्रह्मा तृप्यताम्। ॐ विष्णुः तृप्यताम्। ॐ रुद्रः तृप्यताम्। ॐ प्रजापतिः तृप्यताम्। ॐ देवाः यक्षास्तथा नागाः गन्धर्वाऽपरससोऽसुराः। क्रूराः सर्पाः सुपर्णाश्च तरवो जम्भकाः खगाः॥ विद्याधरा जलाधाराः तथैवाऽऽकाशगामिनः। निराधाराश्च ये जीवाः पापेऽधर्मे रताश्च ये। तेषामाप्यायनायैतद् दीयते सलिलं मया॥ (२) { सनकादि ऋषितर्पण } उत्तर दिशा की ओर घूमें, जनेऊ की माला बना कर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुए १-१ अञ्जलि जल दें ⤵️ ॐ सनकादय आगच्छन्तु (इत्यावाह्य) – ॐ सनकश्च सनन्दश्च तृतीयश्च सनातनः। कपिलश्चाऽसुरिश्चैव वोढुः पञ्चशिखस्तथा॥ सर्वे त...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_31

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#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_31 एक अनजान खत उनके लिए जो कभी अपने थे... #यादें_जिंदा_रहेंगीं बातें   करनी   थी   आपसे   बहुत   सारी ,  इतनी   कि   बाकी   की   ज़िंदगी  के  हरेक   पल   उनके   सहारे   काट   सकूं ।   जब    अचानक     फोन   आपका    आया   तो   नहीं    जानता    था    कि    ये    पहली   और   आख़िरी    बार    है    वरना    सहेज     लेता    सब .  .  .  .  जो   आपने    कहा,   किया ;    पर    अफ़सोस    कि    आपकी   आवाज़    का    एक    क़तरा    भी   नहीं   ...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_30

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वास्तविक तिथि ➡️21.01.2020 # अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_30 #खतों_का_सिलसिला... से अमृता का एक खत इमरोज़ के नाम... प्यार के उन पथिकों के लिए..... जिन्होंने राह के काँटे नहीं गिने..... मंज़िल की परवाह नहीं की..... किया तो सिर्फ प्यार......जिया तो सिर्फ प्यार...... अमृता प्रीतम की लेखनी उनका अपना जिया हुआ संसार था, उनका अपना अनुभव था. ऐसा अनुभव जिसकी साहिर ने नींव रखी थी और जिसे इमरोज ने अपने प्रेम से जीवन भर सींचा था. मैं तुम्हें फिर मिलूंगी कहां? किस तरह? नहीं जानती अमृता प्रीतम की कविता की ये दो पंक्तियां उनके पूरे जीवन की कहानी को बयां करती है. 100 बरस के बाद एक साहित्यकार,लेखक, कवि को किस रूप में याद किया जा सकता है? अगर 100 साल बाद भी किसी साहित्यकार को याद किया जा रहा है तो उसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? अमृता प्रीतम को बतौर लेखक, कहानीकार, कवयित्री याद किया जा सकता है. लेकिन इससे इतर भी उनका जीवन विशाल अनुभव और कहानियां समेटे हुए हैं. सादगी भरा जीवन, अल्हड़पन, प्रेम के लिए तड़प, जिद्दीपन और कविताओं के ज़रिए इश्क को न...

#अभ्युदय"_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_29

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#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_29 #खतों_का_सिलसिला... से अमृता का एक खत इमरोज़ के नाम... प्यार के उन पथिकों के लिए..... जिन्होंने राह के काँटे नहीं गिने..... मंज़िल की परवाह नहीं की..... किया तो सिर्फ प्यार......जिया तो सिर्फ प्यार...... इमरोज़ तुम मेरी ज़िंदगी की शाम में क्यों मिले, दोपहर में क्यों नहीं' अमृता प्रीतम की प्रेम कहानी अमृता प्रीतम ने अपनी आत्मकथा 'रसीदी टिकट' में अपने और इमरोज़ के बीच के आत्मिक रिश्तों को भी  बेहतरीन ढंग से क़लमबंद किया। इस किताब में अमृता ने अपनी ज़िंदगी कई परतों को खोलने की कोशिश की है।  'रसीदी टिकट' में अमृता ख़ुद से जुड़े हुए कई ब्योरे यहां खुलकर बताती हैं। अमृता कई बार इमरोज़ से कहतीं-  "अजनबी तुम मुझे जिंदगी की शाम में क्यों मिले, मिलना था तो दोपहर में मिलते।" अमृता इमरोज़ से अक्सर इस तरह के सवाल पूछती थीं, क्योंकि इमरोज़ अमृता की ज़िंदगी में बहुत देर से आये थे। मगर वो दोनों एक ही घर में एक ही छत के नीचे दो अलग-अलग कमरे में रहते थे। अमृता के संग रहने के लिए इमरोज़ ने उनसे कहा था, इस पर ...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_28

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वास्तविक तिथि ➡️ 19.01.2020 #अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_28 #खतों_का_सिलसिला... से अमृता का एक खत इमरोज़ के नाम... प्यार के उन पथिकों के लिए..... जिन्होंने राह के काँटे नहीं गिने..... मंज़िल की परवाह नहीं की..... किया तो सिर्फ प्यार......जिया तो सिर्फ प्यार...... प्यार के रिश्ते बने बनाए नहीं मिलते... #अमृता तू सुगंध है सुगन्ध किसी की मल्कियत नहीं हुआ करती तू मेरी मल्कियत नहीं सुगंध एहसास के लिए हैं बाजुओं में उसकी कल्पना धोखा है अपने आप से धोखे में जीना खुद को कत्ल करना है मैंने खुद को कत्ल किया है मैंने हर पल जहर पीया है हर सोच में तू मेरी है सिर्फ मेरी और हकीकत में सदियों का फासला है सपना स्मृति से फिसल जाता है सच आलिंगन में रह जाता है... यह पंक्तियाँ अमृता की किताब  वर्जित बाग़ की गाथा  से ली गयी है ...उन्होंने लिखा है कि मैं यदि पूरी गाथा लिखने लगूंगी तो मेरी नज्मों का लम्बा इतिहास हो जाएगा इस लिए इन में बिलकुल पहले दिनों कि बात लिखूंगी जब मैंने वर्जित बाग़ को देख लिया तो अपना ही कागज कानों में खड़कने लगा था .. तुम्ह...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_27

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वास्तविक तिथि ➡️ 18.01.2020 अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_27 #खतों_का_सिलसिला... से अमृता का एक खत इमरोज़ के नाम... प्यार के उन पथिकों के लिए..... जिन्होंने राह के काँटे नहीं गिने..... मंज़िल की परवाह नहीं की..... किया तो सिर्फ प्यार......जिया तो सिर्फ प्यार...... #अमृता_की_याद_में ज़िन्दगी से सवाल करता एक ख़त .... अमृता प्रीतम जी ने अनेक कहानियाँ लिखी है इन कहानियों में प्रतिबिम्बित हैं स्त्री पुरुष के योग-वियोग की मर्म कथा और परिवार ,समाज से दुखते नारी के दर्द के बोलते लफ्ज़ हैं ...कई कहानियाँ अपनी अमिट छाप दिल में छोड़ जाती है .....कुछ कहानियाँ अमृता जी ने खुद ही अपने लिखे से अलग संग्रह की थी और वह तो जैसे एक अमृत कलश बन गयी .. उन्हीं कहानियों में से एक कहानी है  गुलियाना का एक ख़त....जिसके नाम का अर्थ है फूलों सी औरत   .....पर वह लोहे के पैरों से लगातार दो साल चल कर युगोस्लाविया से चल कर अमृता तक आ पहुंची। अमृता ने मुस्करा कर उसका स्वागत किया और पूछा ---कि इतनी छोटी उम्र में क्यों इस तरह से देश देश भटक रही हो और क्या खोज रही हो ? उसने म...