Posts

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_37

Image
इतिहास के पन्नों से : पुष्यमित्र शुंग   पुष्यमित्र शुंग ( १८५– १४९ ई॰पू॰ ) प्राचीन उत्तर भारत के एक हिंदू राजा थे Man on a relief, Bharhut, Sunga period, 2nd century BCE. शुंग साम्राज्य शासनावधि ~ ल. 185 पूर्ववर्ती बृहद्रथ मौर्य उत्तरवर्ती अग्निमित्र संतान अग्निमित्र राजवंश शुंग  साम्राज्य धर्म हिंदू पुष्यमित्र शुंग साम्राज्य के संस्थापक और प्रथम राजा थे। इससे पहले वे  मौर्य साम्राज्य  में सेनापति थे। १८५ ई॰पूर्व में शुंग ने अन्तिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ मौर्य के अहिंसक नीतियों के कारण उनका वध कर स्वयं को राजा उद्घोषित किया। उसके बाद उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया और उत्तर भारत का अधिकतर हिस्सा अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। शुंग राज्य के शिलालेख पंजाब के जालन्धर में मिले हैं और दिव्यावदान के अनुसार यह राज्य सांग्ला (वर्तमान सियालकोट) तक विस्तृत था| भारत वर्ष में कई महान राजा हुए हैं| हिंदू धर्म ग्रंथ और ऐतिहासिक साहित्य इनका वर्णन करते हैं| पुराणों में पुष्यमित्र शुंग का एक महान र...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_36

Image
मूल्यांकन में समग्रता का अभाव वर्तमान समय की ये विडम्बना है कि एक दूसरे का चारित्रिक विश्लेषण करते समय अत्यंत जल्दबाजी कर बैठते हैं, आमुख व्यक्ति के जीवन मे घटित किसी विशेष परिस्थितियों में उसके द्वारा किये (पूर्ण रूप से अव्यक्त) व्यवहार के आधार पर उसके पूरे जीवन का मूल्यांकन कर बैठते हैं, जबकि किसी व्यक्ति के चारित्रिक विश्लेषण करते वक्त उसके जीवन की समग्रता का लोप नहीं होने देना चाहिए। क्योंकि किसी विशेष परिस्थितियों में हम एक विशेष प्रकार का आचरण करने लगते हैं। उस आचरण से हमारे सम्पूर्ण जीवन का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। आइए जीवन के विभिन्न पहलुओं में कुछ का विश्लेषण थोड़ा थोड़ा करते हैं : ★ जब परिस्थियाँ आनन्ददाति रहती हैं तो हम विभिन्न अभिव्यक्ति द्वारा अपनी खुशी व्यक्त करते हैं। इस अभिव्यक्ति पर अब कोई ये कहने लगे कि ये अमुक आदमी हमेशा तरह खुश ही रहता है, बात बात पर मुस्कुराता ही रहता है, ये अतिउत्साही है, एकदम पागल आदमी है... ★जब परिस्थियाँ दुखदाई होती हैं, शोकजन्य होती है तो हम चिंतित रहते हैं, व्यथित रहते हैं, शोकाकुल रहते हैं और खूब रोते भी हैं। अब कोई ये कहने ल...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_35

Image
ये सच है कि हमारी व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय अथवा वैश्विक सोच की सफल कर्मनिष्ठ प्रतिभा अपने शैक्षणिक अथवा अनुसंधानिक भौतिक चर्मोत्कर्ष पर कितने हीं दम्भ क्यूँ न भर लें, आत्मविश्वासी हो जाएं, आत्मनिर्भर हो जायें, हम एक इंसान होने की राह में बहुत बहुत पीछे हैं. वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रमाणिक प्रयास कहता है कि धरती पर जीवन का प्रारंभ 2000 करोड़ वर्ष पहले हुई, तब से आज तक विभिन्न प्राकृतिक अथवा मानवजनित भीषण विभीषिका से जूझते हुए जीवन का कार्मिक विकाश होते हुए हम आज की सभ्य कही जाने वाली सभ्यता के पड़ाव में पहुँचे हैं. वर्तमान में सभी प्रकार की प्रगति अपने चर्मोत्कर्ष पर है, चाहे अंतरिक्ष अनुसंधान की बात हो, मानव के भौतिक सुखों का विकल्पों की बात हो,शैक्षणिक, चिकित्सीय हो, सम्वाद के विभिन्न आयाम की बात हो अन्य संस्थानगत हो, अफसोस इतने चर्मोत्कर्ष के उपरांत असंख्य लोग भूख से असामयिक मृत्यु के शिकार हो रहे हैं, असंख्य लोगों जो जीने के लिए भी भोजन की दरकार है और बहुत सी हृदयविदारक विषंगतियाँ... आज आर्थिक विषमता के कारण गरीब और अमीरों के बीच खाई बढ़ती जा रही है, ये विसंगतियाँ ही सभी समस्या क...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_34

Image
अपात्र नेतृत्व, गुमराह युवान और कराहता जनहित निदा फाजली की एक कृति जो आज के हमारे समकक्ष युवान साथियों पर क्या खूब जचती है... अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख हवाओं का जिधर का है, उधर के हम हैं पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है अपने ही घर में, किसी दूसरे घर के हम हैं | वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से किसको मालूम, कहाँ के हैं, किधर के हम हैं चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब सोचते रहते हैं, किस राहगुज़र के हम हैं गिनतियों में ही गिने जाते हैं हर दौर में हम हर क़लमकार की बेनाम ख़बर के हम है हमारे युवान साथी क्या सचमुच इतने हल्के जमीर के हो गए...!! ठहरिए, सोचिए, नहीं तो आज का बुद्धिमान प्रपंची नेतृत्व हमें कहिं का नहीं छोड़ेगा, वर्तमान में वो खुद के लिए आपका उपयोग करेगा फिर अपने पाल्यों के लिए निबंधित करेगा... हे भारत ! राष्ट्र के प्रति अपने नैतिक कर्तव्यों के निर्वहन से न कतराएं, न घबरायें, अपनी हिम्मत हारती जिजीविषा से कहें #डटे_रहो व अपनी अंतरात्मा को हमेशा स्पंदित करते रहें अपने उत्तरदायित्व के प्रति। अपनी प्राथमिकताऐं निश्चित करें और कदम बढ़ाएं...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_33

Image
#एक_सकारात्मक_विश्लेषण  दिनांक : 23.02.2021, मंगलवार #लोकतंत्र_में_लोग_सरकार_बदलते_क्यों_हैं ..?? के उत्तर में सुश्री twitter.com/VanditaMishr जी अपने #क्विक_रिएक्शन के माध्यम से लिखती हैं की ; लोकतंत्र में "लोग" सरकार इसलिए बदलते हैं जिससे लोगों के #जीवन_स्तर_में_बढ़ोतरी , #सुरक्षा और #स्वतंत्रता आदि मुद्दों पर कुछ और #सकारात्मक_बदलाव को देखा और महसूस किया जा सके. सरकार यह छोटी सी बात नहीं समझ पा रही है कि यह देश आज, कल या पिछले कल नहीं बना, इसका निर्माण #गीता लिखने और #श्रीराम के पैदा होने से पहले ही हो चुका था. यहां......आम जनमानस को डराया नहीं जा सकता. #श्रीमद्भागवतगीता के 16वें अध्याय में दैवीय गुण बताए गए हैं जिसमें " #अभय " सबसे ऊपर है. यह भारत का गुण है, भारत की #आत्मा है... और ज्यादा पढ़ने हेतु नीचे दिए #क्विक_रिएक्शन को और #श्रीमद्भागवद्गीता के 16वें अध्याय को पुरा पढ़ें. ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● #रामचरितमानस के उत्तरकांड में भी बाबा तुलसीदास जी लिखते हैं कि लंकाविजय के उपरांत अयोध्या में राज्याभिषेक के बाद एक दिन प्रभु श्रीराम अपने सभी स...

#अभ्युदय_से_चरमोत्कर्ष #एपिसोड_32

Image
  #अभ्युदय_से_चरमोत्कर्ष #एपिसोड_32 पितृपक्ष तर्पण : विधि एवं मंत्रोच्चारण देव तर्पण आरम्भ : भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, चतुर्दशी एवं पूर्णिमा पितृ तर्पण आरम्भ : आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा ( पैरवा ) तिथि से आरम्भ तर्पण की विधि और मंत्र स्नान के उपरांत मन के शुद्धिकरण हेतु गायत्री मंत्र का एक बार स्मरण करें (१) { देवतर्पण } पूर्व दिशा की ओर खड़े होकर, हाथ में त्रिकुशा लेकर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुए १-१ अञ्जलि जल दें ⤵️ ॐ ब्रह्मा तृप्यताम्। ॐ विष्णुः तृप्यताम्। ॐ रुद्रः तृप्यताम्। ॐ प्रजापतिः तृप्यताम्। ॐ देवाः यक्षास्तथा नागाः गन्धर्वाऽपरससोऽसुराः। क्रूराः सर्पाः सुपर्णाश्च तरवो जम्भकाः खगाः॥ विद्याधरा जलाधाराः तथैवाऽऽकाशगामिनः। निराधाराश्च ये जीवाः पापेऽधर्मे रताश्च ये। तेषामाप्यायनायैतद् दीयते सलिलं मया॥ (२) { सनकादि ऋषितर्पण } उत्तर दिशा की ओर घूमें, जनेऊ की माला बना कर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुए १-१ अञ्जलि जल दें ⤵️ ॐ सनकादय आगच्छन्तु (इत्यावाह्य) – ॐ सनकश्च सनन्दश्च तृतीयश्च सनातनः। कपिलश्चाऽसुरिश्चैव वोढुः पञ्चशिखस्तथा॥ सर्वे त...

#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_31

Image
#अभ्युदय_से_चर्मोत्कर्ष #एपिसोड_31 एक अनजान खत उनके लिए जो कभी अपने थे... #यादें_जिंदा_रहेंगीं बातें   करनी   थी   आपसे   बहुत   सारी ,  इतनी   कि   बाकी   की   ज़िंदगी  के  हरेक   पल   उनके   सहारे   काट   सकूं ।   जब    अचानक     फोन   आपका    आया   तो   नहीं    जानता    था    कि    ये    पहली   और   आख़िरी    बार    है    वरना    सहेज     लेता    सब .  .  .  .  जो   आपने    कहा,   किया ;    पर    अफ़सोस    कि    आपकी   आवाज़    का    एक    क़तरा    भी   नहीं   ...